हमीरपुर: शोहदों की छेड़खानी से परेशान युवती ने दी जान

हमीरपुर: शोहदों की छेड़खानी से परेशान युवती ने दी जान

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र के धनौरी गांव में शोहदों की छेड़छाड़ से परेशान एक युवती ने आत्महत्या कर ली है। बता दें कि शराबियों ने सरेराह युवती से अभद्रता की थी, जिसके बाद युवती ने फांसी के फंदे से झूल गयी। घटना के बाद परिजनों ने तीन लोगों के खिलाफ तहरीर दी है।

नहीं रुक रही है छेड़खानी की घटनाएं

गौरतलब है कि महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाली छेड़खानी की घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया है। इसके तहत हर जिले में स्पेशल टीम बनाई गई है। साथ ही हर थाने में दो सिपाही इस दस्ते से जुड़े रहते हैं। दस्ते के जवान स्कूल, कॉलेज, प्रमुख बाजारों के अलावा भीड़भाड़ वाले जगहों पर नजर बनाए रखते हैं। यही नहीं योगी सरकार ने लड़कियों में आत्मविश्वास जगाने के लिए पिछले महीने बालिका सुरक्षा माह चलाया। लेकिन एनसीआरबी की रिपोर्ट कहती है कि योगी सरकार के ये दावे बेकार साबित हो रहे हैं। साल 2016 के मुताबिक छेड़खानी के मामलों में पचास फीसदी की वृद्धी हुई है।

-साल 2016 में छेड़खानी से जुड़े 609 मामले सामने आए थे. जो 2017 नें बढ़कर 993 हो गए.

-साल 2018 में इस तरह के मामलों में अप्रत्याशित बढोत्तरी देखने को मिली. ये आंकड़ा 1328 तक पहुंच गया.

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कब तक लुटती रहेगी महिलाओं की आबरू?

छेड़खानी ही क्यों? यूपी में महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार के मामले भी अब डरा रहे हैं. शहर-दर-शहर रेप से जुड़े मामलों ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है. शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब इस तरह के मामलों से अखबार के पन्ने ना रंगे हों. हैवानों के चंगुल में सिसकती महिलाओं की हर कोशिश नाकाम जा रही है. एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक रेप से जुड़े मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है।

-साल 2016 में जहां से रेप से जुड़े 3419 मामले सामने आए, वहीं 2017 में ये आंकड़ा बढ़कर 4246 तक पहुंच गया था.

-हालांकि 2018 में इसमें कुछ कमी आई और ये आंकड़ा फिलहाल 3946 है.

नाबालिगों पर भी बुरी नजर:

हैवानियत का खेल नाबालिग बेटियों के साथ भी खेला जा रहा है. दरिंदों के आगे पाक्सो एक्ट का कड़ा कानून भी बेकार साबित हो रहा है. एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि यूपी में नाबालिग लड़कियां महफूज नहीं हैं. सिर्फ घर के बाहर ही नहीं बल्कि घर के अंदर भी वो छली जा रही है. कभी बेगाने तो कभी अपने ही उनकी आबरु के लुटेरे बन रहे हैं.

-साल 2016 में जहां पाक्सो एक्ट से जुड़े 4089 मामले सामने आए.

-वहीं 2017 में ये आंकड़ा पहुंचकर 4894 तक हो गया.

-साल 2018 में पाक्सो से जुड़े 5797 मामले सामने आ चुके हैं.

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