ऐसे स्मार्ट बनते हैं UP पुलिस के महाराणा, जैकब और पृथ्वीराज

ऐसे स्मार्ट बनते हैं UP पुलिस के महाराणा, जैकब और पृथ्वीराज

उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार टेक्नालॉजी के जरिए खुद को हाइटेक और स्मार्ट बनाने में जुटी है जिससे अपराध पर पूरी तरह से लगाम लगाया जा सके। अपराधियों के पीछे फर्राटा भरती पुलिस की हाइटेक गाड़ियां और अत्याधुनिक असलहे से लैस पुलिसकर्मी इस बात की तस्दीक करते हैं कि, यूपी पुलिस की नियमावली भले ही अंग्रेजों के जमाने की हो लेकिन उनकी कार्यशैली, जवान और असलहे 21वीं सदी के हैं। उन सब के बीच जो अहम बात और सबसे खास है वो है घुड़सवार पुलिस। इसकी भी स्थापना अंग्रेजों के समय हुई थी और अंग्रेजी शासनकाल में सैनिक और दारोगा इसी से चलते थे। समय के साथ यूपी पुलिस में ढेरों बदलाव हुए लेकिन घुड़सवार पुलिस की अपनी अलग खासियत है और आज भी इनकी भूमिका बेहद ही खास होती है। वाराणसी की सड़कों पर महाराणा, प्रताप, जैकप, पृथ्वीराज और अलेक्जेंडर के टापों की आवाज अक्सर सुनाई देती रहती है।

घुड़सवार पुलिस के प्रभारी इंस्पेक्टर रामकुमार बताते हैं कि,100 लोगों की भीड़ मात्र 2 घुड़सवार पुलिस आसानी से बिना बलपूर्वक कंट्रोल कर सकती है। यही वजह है कि, कुंभ जैसे विशाल आयोजनों में प्रशासन घुड़सवार पुलिस पर अपना भरोसा जताती है। कुम्भ मेले में घुड़सवार पुलिस जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए लाखों की भीड़ को कंट्रोल करने के साथ ही नागा साधुओं के शाही जुलूस को भी नियंत्रित करती है।काशी के लक्खा मेलों में शुमार रामनगर की रामलीला, चेतगंज की नक्कटैया, नाटी इमली के भरत मिलाप व अभी बीते रथयात्रा के मेले में घुड़सवार पुलिस ने अहम भूमिका निभाई।

वाराणसी घुड़सवार पुलिस सिर्फ जिले में मेलों या फिर किसी बड़े आयोजन में ही अपनी अहम भूमिका नहीं निभाते हैं बल्कि जिले से बाहर भी इन्हें भेजा जाता है। जिसमें…

  • वर्ष में एक बार नवम्बर-दिसम्बर में लखनऊ में होने वाली रैतिक परेड ( जिसमें गवर्नर साहब को सलामी दी जाती है) में शामिल होते हैं।
  • ददरी मेला बलिया (छठ के आस पास)
  • विंध्यवासिनी मेला (चैती व शारदीय नवरात्र)

वर्तमान में घोड़ों की स्थिति

वर्तमान में वाराणसी अस्तबल में टोटल 18 घोड़े हैं जिनमें से 16 घोड़ा व 2 घोड़ी हैं। 17 देशी व एक हाफ ब्रीड नस्ल के है। सभी घोड़े अपने नाम से जाने जाते हैं। जैसे महाराणा, प्रताप, पृथ्वीराज, जैकब, एलेक्जेंडर, बाबर, शैलजा (घोड़ी)। घोड़ों को सरकार की तरफ से मिलने वाली खुराक की बात करें तों प्रतिदिन के हिसाब से 1 किलो चना, 2 किलो जौ, 1 किलो चोकर, 30 ग्राम नमक आवश्यकतानुसार घास दी जाती है।

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घुड़सवार प्रतियोगिता

वाराणसी के घुड़सवार पुलिस साल में एक बार मुरादाबाद स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर पुलिस अकादमी में अन्तरजोनल घुड़सवारी प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। यूपी लेवल में 2nd पोजिशन मिला।

Ramkumar with medals

प्रशिक्षण

घोड़ों को 6 महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान घोड़ों को सिखाया जाता है, कैसे भीड़ को कंट्रोल करें। कैसे जुलूस में बम पटाखे फूटने पर घोड़ों के भड़कने पर उन्हें नियंत्रित किया जाए। चाल (घोड़ो को चलने का तरीका सिखाया जाता है) स्पोर्ट्स में जम्प व ट्रेन्ड पैकिंग सिखाया जाता है। राइडर को भी 6 से 9 महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

रामकुमार – प्रभारी (घुड़सवार पुलिस)

Ramkumar

प्रभारी रामकुमार उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के निवासी हैं। इन्होंने अपनी पढ़ाई फतेहपुर से की और उसके बाद रामकुमार की नियुक्ति 9 फरवरी 1988 को इलाहाबाद में घुड़सवार पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुई। इलाहाबाद से कानपुर आये। कानपुर से इनका प्रमोशन मुरादाबाद घुड़सवार पुलिस में मुख्य आरक्षी के पद पर हुआ। मुरादाबाद में ही अखिल भारतीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल मिलने के बाद इनका प्रमोशन उपनिरीक्षक पद पर हुआ। साल 2007-12 तक अलीगढ़, आगरा 2012-17 और फिर वाराणसी आ गए।

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