वो ‘दबंग’ इंस्पेक्टर जिसके लिए मुख्यमंत्री ने कानून तोड़ दिया था

नथुआपुर कांड का बदला लेने वाला इंस्पेक्टर

वो ‘दबंग’ इंस्पेक्टर जिसके लिए मुख्यमंत्री ने कानून तोड़ दिया था

उत्तर प्रदेश पुलिस में ऐसे किस्सों की भरमार है, जिन्हें पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। आज भले ही यूपी पुलिस पर तमाम तरह के आरोप लगाये जाते हों, लेकिन इसी उत्तर प्रदेश पुलिस ने देश को एक से बढ़कर एक ईमानदार, तेज-तर्रार और दबंग पुलिसकर्मी दिए हैं, जो किसी भी स्थिति में झुकने की बजाय मरना पसंद करते हैं। आज अपनी इस कड़ी में हम एक ऐसे ही दबंग इंस्पेक्टर की कहानी पढ़ेंगे जो पहले तो डाकुओं को ‘खूनी-मुठभेड़’ में मार डालता था, उसके बाद चंदा इकठ्ठा कर उनके अंतिम संस्कार में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करता था।

इतना ही नहीं, इसी दबंग इंस्पेक्टर के लिए सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ‘पुलिसिया कानूनों’ को तोड़-मरोड़कर रख दिया था। इसी दबंग इंस्पेक्टर को सड़क हादसे में घायल होने के बावजूद आधी रात में कड़ी सुरक्षा के बीच रात के गहरे अँधेरे में ‘गहन सुरक्षा’ के बीच छिपाकर पुलिसिया वाहनों से उस थाने का चार्ज लेने के लिए भेजा गया था, जिसका नाम सुनकर यूपी पुलिस के कई तथाकथित “दबंग” पुलिसकर्मियों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। हम बात कर रहे हैं, यूपी पुलिस से रिटायर हो चुके ‘दबंग’ इंस्पेक्टर रामचरण सिंह की, जिन्हें पड़ोसी आज भी ‘कोतवाल’ कहते हैं।

कौन हैं ‘कोतवाल’ रामचरण सिंह?:

यूपी पुलिस से रिटायर हो चुके रामचरण सिंह का जन्म 3 फरवरी साल 1943 को दिल्ली से सटे यूपी के बुलंदशहर जिले के गाँव चरौरा में हुआ था। उनकी मां का नाम मुख्त्यार कौर और पिता का नाम चौधरी रिसाल सिंह था। हालातों के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई ननिहाल (गांव सैदपुरा) के छप्पर वाले घर में रहकर करनी पड़ी थी। साल 1966 में वे यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए थे। जब वे सीबीसीआईडी बरेली में बतौर इंस्पेक्टर तैनात थे, तब गंभीर एक्सीडेंट के बाद उन्होंने साल 1990 में पुलिस विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

‘नथुआपुर कांड’ जिसने कई दबंग इंस्पेक्टरों की कलई खोल दी थी:

रामचरण सिंह के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने तमाम पुलिस के कानून बदल दिए थे, आखिर क्यों? वजह था एटा जिले का ‘नथुआपुर कांड’। जिसने यूपी पुलिस के कई तथाकथित “दबंगों” की कलई खोल कर रख दी थी। दरअसल, यह बात साल 1981 की है, तकरीबन 37 साल पहले की। जब एटा जिले के सराय अगहत इलाके में डाकुओं के गैंग ने मिलकर एक सुनार के यहाँ डाके की वारदात को अंजाम दिया था। वहीँ, मामले के खुलासे में जुटे अलीगंज थाने के इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और PAC के कई जवान समेत तीन ग्रामीण डाकुओं के साथ मुठभेड़ में शहीद हो चुके थे। पुलिस और PAC के पास मौजूद LMG जैसे स्वचालित हथियार भी डाकुओं ने लूट लिए थे। नथुआपुर कांड में मिली हार और पुलिसकर्मियों की मौत ने यूपी पुलिस और सूबे की तत्कालीन सरकार को बौखला कर रख दिया था।

नथुआपुर कांड से बौखलाई बैठी सरकार और यूपी पुलिस ने उस दिलेर की तलाश शुरू कर दी, जो इस कांड का बदला डाकुओं से लेकर आगे-पीछे का सारा हिसाब-किताब बराबर कर दे। जिसके चलते आगरा रेंज के अंतर्गत फिरोजाबाद दक्षिण में तैनात इंस्पेक्टर को तलब किया गया, लेकिन डाकू छबिराम, पोथीराम का नाम सुनते ही उसे सांप सूंघ गया। आपको शायद यकीन न हो, लेकिन इंस्पेक्टर ने इस मामले में अपना पीछा छुड़वाने के लिए फिरोजाबाद शहर ही बंद करा दिया था।

फिरोजाबाद के बाद गाजियाबाद में तैनात एक दबंग इंस्पेक्टर का लाया गया, तो इस पोस्टिंग से बचने के लिए वो इंस्पेक्टर अपनी बेटियों के साथ पुलिस के आला अधिकारियों के सामने जाकर पेश हो गया था। उस इंस्पेक्टर ने दलील दी थी कि, उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है और ऐसे में नथुआपुर कांड का बदला लेने में असमर्थ है। बताया तो यहाँ तक जाता है कि, एक इंस्पेक्टर नथुआपुर कांड का बदला लेने से बचने के लिए बाकायदा अस्पताल में भर्ती हो गया था।

वो समय जब रामचरण सिंह के लिए मुख्यमंत्री ने कानून बदल दिया:

नथुआपुर कांड के बाद बात पुलिस की इज्जत बचाने की आ गयी थी, लेकिन यूपी पुलिस के सभी तथाकथित दबंग इंस्पेक्टर अपने हाथ खड़े कर चुके थे। पेंच फंसता देख तत्कालीन एटा जिले के एसपी विक्रम सिंह(जो कि, बाद में यूपी पुलिस के महानिदेशक बने थे) ने इंस्पेक्टर रामचरण सिंह का नाम आईजी, एडिशनल आईजी और मुख्यमंत्री तक पहुँचाया, लेकिन समस्या यह थी कि, इंस्पेक्टर रामचरण सिंह उस समय CBCID बरेली में तैनात थे। मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप को जानकारी दी गयी कि, इंस्पेक्टर रामचरण जहाँ तैनात है, वहां तीन साल से पहले ट्रान्सफर नहीं हो सकता है। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने इंस्पेक्टर रामचरण सिंह की एटा के अलीगंज थाने में तैनाती के लिए पुलिस के कानून को ही तोड़-मरोड़ दिया और उनका ट्रान्सफर CBCID बरेली से सिविल पुलिस में कर दिया गया।

गौरतलब है कि, उस समय इंस्पेक्टर रामचरण सिंह सड़क हादसे में घायल हो गए थे, उसके बाद भी उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस की गाड़ियों में छिपाकर अलीगंज थाने पहुँचाया गया था।

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