…तो इसलिए बदमाशों को दूर की जेलों में किया जा रहा शिफ्ट

…तो इसलिए बदमाशों को दूर की जेलों में किया जा रहा शिफ्ट

यूपी पुलिस जब से हाथ में हथियार लेकर बदमाशों की गिरफ्तारी करने लगी है, तब से हिस्ट्रीशीटर, गैंगेस्टर खुद ही सरेंडर कर जेल में जाना ज्यादा मुनासिब समझते हैं लेकिन ऐसा नहीं कि जेल में जाने के बाद उनकी आपराधिक प्रवृति और अवैध कामों पर लगाम लग जाती है, बल्कि जेल में पुलिस एनकाउंटर से दूर सुरक्षित बैठकर अपने नेटवर्क का जाल बढ़ाने में लगे हुए हैं। हालाँकि इसपर रोक लगाने के लिए पुलिस ने हल निकाल लिया है।

बदमाशो को लगातार किया जा रहा दूर दराज की जेलों में शिफ्ट

पुलिस बदमाशों के नेटवर्क और साथियों से सम्पर्क को ध्वस्त करने के लिए उन्हें कई किलों मीटर दूर की जेलों में शिफ्ट करने में लगी हुई है। इसके लिए उन्होंने चार शातिर बदमाशों को दूर की जेलों में भेज भी दिया है।

दरअसल यह चार अपराधी रंगदारी, हत्या जैसे मामलों में दोषी हैं। कुछ समय पहले ही हब्बू और सद्दाम ने कोर्ट में सरेंडर किया था, जिसके बाद उन्हें रायबरेली जेल, फिर सेंट्रल जेल नैनी आदि में भेजा गया।

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वहीं अब इन्हें फिर से शिफ्ट किया जा रहा है, ऐसा पुलिस इस लिए कर रही है ताकि उनसे मिलने आने जाने वालों को आर्थिक चोट पहुचाई जा सके। ऐसे अपराधियों से मिलने आने वालो में ज्यादातर उनके नेटवर्क से जुड़े लोग ही होते हैं, जो उनके गोरखधंधे को जेल के बाहर संचालित करते हैं।

ऐसे में जब दूर की जेलों में आने जाने के लिए उनको अधिक किराया या काफी पैसा खर्च करना पड़ेगा, तो वे खुद ही कमजोर पड़ने लगेंगे।

इन कैदियों को किया गया शिफ्ट:

बता दें कि अपराधी मोहम्मद जैद को कानपुर देहात, हसनमुल्ला को फैजाबाद, नौशाद अली को बहराइच, तौसीन को आजमगढ़, अंसार अली को हरदोई जेल शिफ्ट कर दिया गया। वहीं शातिर बदमाश हब्बू सरोज को नैनी से झांसी, रायबरेली जेल से सद्दाम को उरई, अशरफ को पीलीभीत, रियाजुल हसन को बांदा जेल शिफ्ट कर दिया गया है।

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