पुलिसकर्मी भूल जायेंगे लापरवाही, लगेगी अपराध पर लगाम

पुलिसकर्मी भूल जायेंगे लापरवाही, लगेगी अपराध पर लगाम

अपराध पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है कि पहले बदमाशों, अपराधियों पर निगरानी रखी जाए और घटना होने से पहले ही रोक ली जाए। इस कार्रवाई के लिए ‘एक अपराधी एक सिपाही’ योजना की शुरुआत हुई है। इस योजना के तहत हर थाने में तैनात पुलिसकर्मी लिस्टेड अपराधियों पर निगरानी रखेंगे और अगर बदमाश अपराध करता पाया गया तो कार्रवाई सिपाही से लेकर थानेदार तक पर की जाएगी।

वो योजना जो लगाएगी पुलिसकर्मियों की ‘लापरवाही पर लगाम’

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अपराध पर लगाम लगाने के लिए एसएसपी अनंत देव तिवारी के तेवर सख्त हैं। यही वजह है कि उन्होंने निर्देश दे दिए हैं कि अगर कोई भी लिस्टेड अपराधी गैरकानूनी या आपराधिक गतिविधि करता पाया गया तो सिपाही और दारोगा पर कार्रवाई होगी, वहीं थानेदार पर भी गाज गिरेगी।

‘एक अपराधी-एक सिपाही’ स्कीम:

दरअसल, कानपुर में बढ़ते अपराध को लेकर एसएसपी ने एक अनोखी स्कीम लागू की है। इस स्कीम का नाम है ‘एक अपराधी-एक सिपाही’। इसके तहत सभी थानों में उस क्षेत्र के अपराधी प्रत्येक सिपाही की निगरानी में होंगे। लूट-चोरी, अवैध हथियार और शराब से जुड़े अपराधों में सक्रिय अपराधियों की तैयार लिस्ट में सभी पुलिसकर्मियों के जिम्मे बदमाशों की निगरानी का काम दिया जायेगा। वहीं थाना स्तर पर टॉप टेन अपराधियों पर एक दारोगा लगाया गया है।

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अपराध के खिलाफ कितनी कारगार ये योजना:

जाहिर है कि एक लूट के अपराधी की गतिविधियों पर जब सिपाही की नजर रहेगी तो उसके लिए ये भांपना कि अपराधी किसी लूट की योजना बना रहा है, आसान हो जाएगा, ऐसे में अपराध होने से पहले रोके जाने की भी सम्भावना बनी रहेगी।

अपराधियों में बढ़ेगा खौफ:

नियोजित अपराध और अपराधियों पर कुछ हद तक तो लगाम लगाई जा सकेगी। प्रदेश के सभी जिलों में थानों में अगर ये योजना लागू हो जाए और इसके जरिये हर थाने में 50 फीसदी अपराध को भी रोका जा सके तो ये किसी बड़ी उपलब्धी से कम नहीं होगा।

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वहीं इस योजना से अपराधियों में भी खौफ रहेगा कि उनपर पुलिस की नजर है और अगर वे पकड़े गये तो उनका एनकाउंटर तक हो सकता है। इस तरह वे खुद भी अपराध करने से पहले एक बार सोचेंगे।

योजना से पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर पड़ेगा प्रभाव :

इस योजना का सीधा असर बीट सिपाही और दारोगा पर पड़ेगा। क्योंकि अपराध रोकने में विफल होने पर उनकी सीधी जवाबदेही होगी तो कार्रवाई भी उनपर ही होगी। इसमें अगर एक भी अपराधी अपराध करता मिला तो बीट सिपाही और दारोगा को लाइन हाजिर कर दिया जायेगा। इतना ही नहीं थानेदार पर भी गाज गिरेगी।

ऐसे में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर दबाव बढ़ेगा और कार्रवाई के डर से वे निष्क्रियता न दिखाते हुए अपराधियों पर पैनी नजर बनाये रखेंगे।

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