भीड़ हिंसा पर कानून बनाने की तैयारी में योगी सरकार, राज्य विधि आयोग ने सौंपा मसौदा

मुख्यमंत्री योगी के साथ आयोग के अध्यक्ष

भीड़ हिंसा पर कानून बनाने की तैयारी में योगी सरकार, राज्य विधि आयोग ने सौंपा मसौदा

देश में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने की तैयारी में अब राज्य आगे आने लगे हैं, जिसके तहत उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भीड़ हिंसा पर कानून बनाकर इस अमानवीय कृत्य को रोकने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि, भीड़ हिंसा को रोकने के लिए राज्य विधि आयोग ने कानून बनाने की सिफारिश की है। ज्ञात हो कि, देश के अन्दर मौजूदा समय में सिर्फ एक राज्य में ही भीड़ हिंसा का कानून बनाया हुआ है। वहीँ, इस कड़ी में उत्तर प्रदेश दूसरा राज्य बन सकता है। गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश सरकार भी भीड़ हिंसा के खिलाफ कानून बनाने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा गया मसौदा:

देश में पिछले कई सालों से मॉब लिंचिंग की घटनाएँ बढ़ गयी हैं। वहीँ, उत्तर प्रदेश में भी भीड़ हिंसा के कई मामले सामने आ चुके हैं। जिन पर लगाम लगाने के लिए अब उत्तर प्रदेश सरकार भीड़ हिंसा कानून की राज्य विधि आयोग की सिफारिशों पर अमल करने की तैयारी कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार को आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए0एन0 मित्तल ने कानून का मसौदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दिया है।

क्या कहती है राज्य विधि आयोग की रिपोर्ट:

राज्य विधि आयोग की रिपोर्ट भीड़ हिंसा पर कहती है कि, पश्चिम बंगाल, केरल, जम्मू व कश्मीर और झारखंड राज्यों में हाल में घटित भीड़ तंत्र की हिंसा अब प्रदेश में भी अपने पैर पसारने लगी है। इसकी रोकथाम जरूरी है। आयोग का यह भी कहना है कि, भीड़ हिंसा पुलिस की लेट-लतीफी का भी एक कारण है। उन्मादी हिंसा की बढ़ती घटनाओं में पुलिस भी निशाने पर रहती है और मित्र पुलिस को जनता अपना शत्रु समझने लगती है।

आयोग अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा करता है कि, इस प्रकार की घटनाएं न केवल गोवंश की कथित रक्षा को लेकर हो रही हैं। बल्कि चोरी, प्रेम प्रसंग, बच्चों की चोरी, बलात्कार तथा कुछ अंधविश्वासों जैसे भूत, प्रेत, चुड़ैल, तंत्र व मंत्र से भी संबंधित मामले सामने आये हैं।

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र:

ज्ञात हो कि, साल 2018 के एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों को चार सप्ताह में इस मामले को पृथक अपराध मानते हुए दंड की व्यवस्था करने को कहा था। राज्य विधि आयोग की रिपोर्ट में देश की सर्वोच्च अदालत के इस फैसले का भी जिक्र किया गया है। इतना ही नहीं, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी भीड़ हिंसा के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कह चुके हैं।

दूसरा राज्य होगा उत्तर प्रदेश:

राज्य विधि आयोग की सिफारिशों के आधार पर अगर उत्तर प्रदेश भीड़ हिंसा पर कानून बनाता है तो, ऐसा करने वाला वह देश का दूसरा राज्य होगा। गौरतलब है कि, वर्तमान समय में यह कानून केवल मणिपुर राज्य में लागू है। जबकि, मध्य प्रदेश सरकार भी इस कानून पर विचार कर रही है।

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