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50 साल पुराना है ‘अंधे की चौकी’ का इतिहास, ऐसे पड़ा नाम..

अंधें की चौकी

50 साल पुराना है ‘अंधे की चौकी’ का इतिहास, ऐसे पड़ा नाम..

उत्तर प्रदेश के काकोरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत “अंधे की चौकी नाम” से प्रसिद्ध चौकी का अब नाम अब बदला जाएगा। 50 साल से अस्तित्व में आई ‘अंधे की चौकी’ को दिव्यांग जनों के सम्मान में बदलने की तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि इसको लेकर अगली नगर निगम की बैठक में प्रस्ताव रखा जाना है। इस बात का ऐलान महापौर संयुक्ता भाटिया ने ब्रेल लिपि के जनक रोबर्ट लूइस ब्रेल की 210वीं जयंती के मौके पर एक कार्यक्रम के दौरान की थी।

दिव्यांग जनों के सम्मान में बदला जायेगा नाम:

दिव्यांग जनों के सम्मान में हरदोई रोड स्थित ‘अंधे की चौकी’ और आलमबाग क्षेत्र के ‘लंगड़ा फाटक’ का नाम बदला जाएगा। उनका नाम करण महापुरुषों के नाम पर किया जाएगा। इसको लेकर अगली नगर निगम कार्यकारिणी बैठक में प्रस्ताव भी लाया जाएगा। यह घोषणा महापौर ने ब्रेल लिपि के जनक रॉबर्ट लुइस ब्रेल की 210 जयंती के मौके पर एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में की।

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नगर निगम की बैठक में लाया जाएगा प्रस्ताव:

महापौर संयुक्ता भाटिया ने बताया कि ब्रेल लिपि के जनक रॉबर्ट लुईस ब्रेल की 210 वीं जयंती के मौके पर दिव्यांग जनों ने उनसे कहा कि अंधे की चौकी और लंगड़ा फाटक जैसे स्थानों के नामकरण में दिव्यांग जनों का मनोबल गिरता है। उनके नाम बदले जाने की मांग की। महापौर संयुक्ता भाटिया ने कहा कि उनकी यह मांग जायज है। ऐसे नाम नहीं होने चाहिए। 

50 साल पुराना है ‘अंधे की चौकी’ का इतिहास:

50 साल पहले इलाके में एक धोबी था जिसकी एक आँख थी, वो कपड़े धोने का काम करके अपना जीवन यापन करता था। आसपास के लोग उसे काना कह कर ही बुलाते थे। एक रोज वो उसी जगह पर मर गया और लोगों ने जगह का नाम ‘अंधे की चौकी’ रख दिया। चूँकि वहां पर उस काने धोबी ने अपनी आखिरी सांसे गिनी तो इसीलिए लोगों ने उस जगह को उसी के नाम पर ‘अंधे की चौकी’ पड़ा।

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