जब्त शराब को पुलिसवाले ही शराब माफियाओं तक पहुंचा रहे हैं!

प्रतीकात्मक चित्र

जब्त शराब को पुलिसवाले ही शराब माफियाओं तक पहुंचा रहे हैं!

उत्तर प्रदेश में बीते दिनों जहरीली शराब के सेवन से सैकड़ों लोग अपनी जिंदगियों से हाथ धो चुके हैं। वहीँ, शासन द्वारा लगातार शराब माफियाओं, जहरीली शराब बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश में हो रहे एक के बाद एक जहरीली शराबकांड बताते हैं कि, शासन के आदेशों के नतीजे ढाक के तीन पात ही रहे हैं। गौरतलब है कि, इसी साल सहारनपुर, फिर कुशीनगर, उसके बाद कानपुर तो फिर बाराबंकी में सैकड़ों लोग चंद पैसों के मुनाफे की लालच की भेंट चढ़ गए। कुशीनगर और सहारनपुर शराबकांड के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने जबरदस्त तेजी दिखाते हुए अवैध शराब बनाने-बेचने वालों पर एक के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाईयां की थीं, लेकिन क्या कारण है कि, प्रशासन के इतनी सख्ती दिखाने के बाद भी अवैध शराब का कारोबार सूबे में थमने का नाम नहीं ले रहा है? तो, इसका जवाब है कि, खुद पुलिस भी इस अवैध तंत्र का हिस्सा बन चुकी है।

जब्त शराब को वापस पहुंचाते हैं शराब माफियाओं तक:

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सूबे में अवैध शराब का खेल इसलिए नहीं रुक रहा है क्योंकि, पुलिस अपना काम ईमानदारी से नहीं कर रही है। दरअसल, सूबे में शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस की सख्ती में तो कोई कमी नहीं आई है और इस सख्ती के चलते ही बड़े पैमाने पर सूबे में अवैध शराब की खेप पकड़ी जा रही है। गौरतलब है कि, यूपी पुलिस चेकिंग अभियान में अवैध शराब को जब्त तो करती है, लेकिन प्रोटोकॉल के मुताबिक, पकड़ी गयी अवैध शराब को तत्काल प्रभाव से डिस्ट्रॉय किया जाना चाहिए।

सूत्र बताते हैं कि, पुलिस द्वारा इस नियम को फॉलो नहीं किया जा रहा है। जिसके तहत पुलिस कागजों में तो पकड़ी गयी अवैध शराब को डिस्ट्रॉय दिखा देती है, लेकिन असलियत में पुलिस द्वारा उस शराब को वापस औने-पौने दामों में बेच दिया जाता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि, पुलिस द्वारा पकड़ी गयी शराब को वापस शराब माफियाओं को ही बेच दी जाती है।

मुख्यमंत्री-DGP के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ:

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूपी पुलिस द्वारा चेकिंग अभियान में सीज की जाने वाली अवैध शराब को पुलिस के द्वारा ही वापस शराब माफियाओं के हाथों बाजार से आधे या एक-तिहाई दामों में बेच दिया जाता है। अगर सूत्रों से प्राप्त इस जानकारी में रत्ती भर भी सच्चाई है तो, ये मान लेना कि, प्रदेश में अवैध शराब से होने वाली मौतें कभी नहीं रुकेंगी अतिश्योक्ति नहीं होगी। सैकड़ों लोगों के परिवार उजड़ने के बाद जहाँ सरकार और महकमे के आला अधिकारियों द्वारा कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन कोतवाली-थाना-चौकी स्तर पर इस तरह का भ्रष्टाचार आने वाले समय में और भी जानें लेता रहेगा।

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