हाशिमपुरा हत्याकांड: वो मंजर जब PAC जवान बन गये थे हत्यारे…

हाशिमपुरा हत्याकांड: वो मंजर जब PAC जवान बन गये थे हत्यारे…

जब जन सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाले हत्यारे बन जाए तो वो दिन और वो मंजर कैसे भुलाया जा सकता है। आज मेरठ जिले के हाशिमपुरा इलाके में हुए सामूहिक नरसंहार की 32वीं बरसी है। दरअसल 1986 में बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने को लेकर हुए दंगों की लपटे जब मेरठ तक पहुंची तो, 42 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी।

32 साल पहले 42 लोगों को पीएसी ने उतार दिया था मौत के घाट:

साल 1987 में आज ही के दिन पीएसी की 41वीं वाहिनी के जवानों ने मेरठ के हाशिमपुरा इलाके से सांप्रदायिक दंगों के मद्देनजर एक तलाशी अभियान चलाते हुए मोहल्ले के करीब 50 लोगों को ट्रक में भर कर ले गये। इसके बाद मुरादनगर में नहर के पास उनकी सामूहिक हत्या कर दी थी। लाशें गंग नहर और हिंडन नदी में फेंक दी गई। जो लोग इस हत्याकांड में बच गये उनके खुलासे के बाद लोगों की रुख काँप गयी और कार्रवाई शुरू हुई।

ये भी पढ़ें: एक लाख पुलिसकर्मियों ने पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल कर दिया वोट

पिछले साल मिली 16 आरोपी जवानों को उम्रकैद की सजा:

कुल 19 पीएसी जवानों को केस में आरोपी पाया गया, लेकिन जब मुकदमा हुआ तो निचली अदालत ने उन्हें पर्याप्त सबूत न होने के अभाव ने संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया। तीन पीएसी जवानों की मौत हो गयी, वहीं बचे 16 आरोपियों को दिल्ली के तीस हजारी हाई कोर्ट ने 31 साल बाद पिछले साल 2018 में उम्रकैद की सजा सुना दी।

(यूपी पुलिस की हर छोटी-बड़ी खबरों को पढ़ने के लिए आप हमें फेसबुक ट्विटर पर और व्हाट्सअप भी फॉलो करें)

Related News

Videos