असलहे और शराब के दम पर लड़े जाते हैं चुनाव ?

असलहे और शराब के दम पर लड़े जाते हैं चुनाव ?

लोकसभा चुनावों की रणभेरी बजते ही एकतऱफ मैदान में उम्मीदवार और पार्टियां आती हैं तो दूसरी तरफ शराब माफिया और अवैध असलहा तस्कर भी मैदान में कूद जातें हैं। चुनाव चाहे लोकसभा,विधानसभा या फिर लोकल बॉडी का हो सब में अवैध शराब और हथियारों की मांग बढ़ जाती है। अवैध हथियारों और शराब फैक्ट्रियों पर पुलिस लगातार छापेमारी कर ऐसे कारोबार पर शिकंजा कस रही है लेकिन उसके बावजूद ये व्यापार कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

खबरों के मुताबिक, जिस दिन से चुनाव आयोग ने तारीखों का एलान किया है उसदिन से लेकर अबतक करीब 6 हजार अवैध असलहे बरामद किए जा चुके हैं और रोजाना 7 से 8 अवैध हथियार बनाने वाले गिरोह पकड़े जा रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी की मानें तो सिर्फ हथियार और अवैध शराब ही नहीं बल्कि हर रोज एक युवक की हत्या हो रही है जिसको लेकर पुलिस प्रशासन चिंता में है। सर्वाधिक अवैध असलहे पश्चिमी यूपी के जिलों बिजनौर, रामपुर, शामली, बरेली, गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ से बरामद हो रहे हैं।

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कारोबार चाहे अवैध हथियारों का हो या फिर अवैध शराब का। बिना पुलिस संरक्षण के नहीं चल सकता है। चुनाव आयोग की लाख कोशिशों के बाद भी पुलिस के अफसर इन माफियाओं से संपर्क में रहते हैं और उन्हें उनके इस काले कारोबार में मदद करते हैं। इसके एवज में उन्हें मोटी रकम मिलती है।

चुनाव से पहले ही निर्वाचन आयोग ने जताई थी चिंता

चुनाव से ठीक पहले प्रदेश के दौरे पर आई निर्वाचन आयोग की टीम ने अवैध असलहों को लेकर चिंता जताई थी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कई जिलों में अवैध असलहों को लेकर हो रही लचर कार्रवाई पर फटकार लगाई थी।

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